खुशियाँ और ग़म Khushiyan Aur Gham Lyrics in Hindi – Mann

Khushiyan Aur Gham Lyrics in Hindi – Sameer

खुशियाँ और ग़म सहती हैं
फिर भी ये चुप रहती हैं
अबतक किसी ने ना जाना
ज़िन्दगी क्या कहती है

खुशियाँ और ग़म सहती हैं
फिर भी ये चुप रहती हैं
अबतक किसी ने ना जाना
ज़िन्दगी क्या कहती है

अपनी कभी तो कभी अजनबी
आसूं कभी तो कभी है हंसी
डर या कभी तो कभी तिश्नगी
लगती है ये तो

खुशियाँ और ग़म सहती हैं
फिर भी ये चुप रहती हैं
अबतक किसी ने ना जाना
ज़िन्दगी क्या कहती है

खामोशियों की धीमी सदा है
ये ज़िन्दगी तो रब की दुआ है
छू के किसी ने इसको देखा कभी ना
एहसास की है खुशबू महकी हवा है

खुशियाँ और ग़म सहती हैं
फिर भी ये चुप रहती है
अबतक किसी ने ना जाना
ज़िन्दगी क्या कहती है
आहा आ हम्म हूं..

मन से कहो तुम, मन की सुनो तुम
मन मीत कोई, मन का चुनो तुम
कुछ भी कहेगी दुनिया, दुनिया की छोडो
पलकों में सजके झिलमिल
सपने बनाओ तुम

खुशियाँ और ग़म सहती हैं
फिर भी ये चुप रहती हैं
अबतक किसी ने ना जाना
ज़िन्दगी क्या कहती है

अपनी कभी तो कभी अजनबी
आसूं कभी तो कभी है हंसी
डर या कभी तो कभी तिश्नगी
लगती है ये तो

खुशियाँ और ग़म सहती है
खुशियाँ और ग़म सहती है
फिर भी ये चुप रहती है
फिर भी ये चुप रहती है
अबतक किसी ने ना जाना
अबतक किसी ने ना जाना
ज़िन्दगी क्या
ज़िन्दगी क्या कहती है

SHARE ON