जुगनी Jugni Lyrics in Hindi – Queen

Jugni Lyrics in Hindi

कोई खिड़की तो
खुली खुली खुली

कभी ऐसा लगे
ड़री रात है रात है रात है
डरी डरी डरी दबे दबे दबे
पैरों से वह चली
कांच की घास पे घास पे घास पे

काली सी रिद्धि में
हुई वह कैद थी
चाँद की वारि
हमने गुलेल थी
तारों की चाभी
से खुली सफेर सी
सुबह सुबह सुबह सुबह

जुगनी हे उडी हे
नए नए पर लिए
ओ पिंजरा खोल
ओ पिंजरा खोल ओ

जुगनी हे उडी हे
दिल में घर किये
ओ पिंजरा खोल
ओ पिंजरा खोल ओ

धकसोले दो ना अबि इसे
फलसफे झूठे
लगे सभी
हो गए हैं
चकनाचूर
चकनाचूर
जो रोशिनी चल
गया हवा
ओढ़े हुए चलने
लगे कहाँ
हुज़ूर है खुद का
नूर खुद का नूर

चौखट पे मांगी
जिसकी मुराद थी
जिसके लिए वह
इतनी उदास थी
कोई न जाने कितनी
वह ख़ास थी
सुबह सुबह सुबह सुबह

जुगनी हे उडी हे
नए नए पर लिए
ओ पिंजरा खोल
ओ पिंजरा खोल ओ

जुगनी हे उडी हे
दिल में घर किये
ओ पिंजरा खोल
ओ पिंजरा खोल ओ

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