हीर Heer Lyrics – DURGAMATI
Heer Lyrics in Hindi
रंज-ए-इश्क़ का क्या जाने
पीर फकीर
ये तो राधा जाने
या फिर जाने हीर
बिन रांझे की हीर हुई मैं
बिन रांझे की हीर हुई मैं
आप ही अपनी पीर हुई मैं
आप ही अपनी पीर हुई मैं
बिन रांझे की हीर हुई मैं
बिन रांझे की हीर हुई मैं
ना मैं बहती ना मैं थमती
ना मैं बहती ना मैं थमती
खारा खारा नीर हुई मैं
खारा खारा नीर हुई मैं
बिन रांझे की हीर हुई मैं
ख़ुद को ख़ुद में क़ैद किया है
ख़ुद को ख़ुद में क़ैद किया है
ख़ुद अपनी ज़ंजीर हुई मैं
ख़ुद अपनी ज़ंजीर हुई मैं
बिन रांझे की हीर हुई मैं
घर की हूँ पर हूँ घर बाहर
घर की हूँ पर हूँ घर बाहर
देहरी की तक़दीर हुई मैं
देहरी की तक़दीर हुई मैं
बिन रांझे की हीर हुई मैं
बिन रांझे की
हीर हुई मैं
SHARE ON