चौदहवीं का चाँद Chaudhvin Ka Chand Ho Hindi Lyrics – Rafi

Hindi Lyrics of Chaudhvin Ka Chand

चौदहवीं का चाँद हो या अफताब हो
जो भी हो तुम खुद की कसम लाजवाब हो
चौदहवीं का चाँद हो

जुल्फ़ें हैं जैसे कांधों पे बादल झुके हुए
जुल्फ़ें हैं जैसे कांधों पे बादल झुके हुए
आँखें हैं जैसे मय के प्याले भरे हुए
मस्ती हैं जिसमे प्यार की तुम वो शराब हो

चौदहवीं का चाँद हो या अफताब हो
जो भी हो तुम खुद की कसम लाजवाब हो
चौदहवीं का चाँद हो

चेहरा है जैसे झील में हँसता हुआ कँवल
चेहरा है जैसे झील में हँसता हुआ कँवल
या जिंदगी के साज़ पे छेड़ी हुई गज़ल
जाने बहार तुम किसी शायर का ख़्वाब हो

चौदहवीं का चाँद हो या अफताब हो
जो भी हो तुम खुद की कसम लाजवाब हो
चौदहवीं का चाँद हो

होंठों पर खेलती हैं तब्बसुम की बिजलियाँ
होंठों पर खेलती हैं तब्बसुम की बिजलियाँ
सजदे तुम्हारी राह में करती हैं कहकशां
दुनिया-ए-हुस्नों इश्क़ का तुम ही शबाब हो

चौदहवीं का चाँद हो या अफताब हो
जो भी हो तुम खुद की कसम लाजवाब हो
चौदहवीं का चाँद हो

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