सूरज पे मंगल भारी Suraj Pe Mangal Bhari Hindi Lyrics – Diljit Dosanjh
Suraj Pe Mangal Bhari Lyrics in Hindi
सूरज पे मंगल भारी
ये कैसी नयी बीमारी
सूरज पे मंगल भारी
ये कैसी नयी बीमारी
इससे बचने का नहीं कोई भी सीन है
कोई नही बचेगा कहला रे बाहू
दोनों पगले है प्राणी
दोनों पगले है प्राणी
सुनलो क्या कहते है ज्ञानी
दोनों पगले है प्राणी
सुनलो क्या कहते है ज्ञानी
इनका तो स्टेटस पेमानेंट क्वारंटिन है
क्वारंटिन में बेटा
सूरज पे मंगल भारी
ये कैसी नयी बीमारी
सूरज पे मंगल भारी
ये कैसी नयी बीमारी
सूरज पे मंगल भारी
कुत्ते बिल्ली का बैर इनका
जनम जनम का पंगा है
इक दूजे का पैर खीचे
हमाम में हर कोई नंगा है
नंगा है भई नंगा है
हमाम में हर कोई नंगा है
सूरज का गुस्सा शामत है
मंगल की चाल क़यामत है
सूरज का गुस्सा शामत है
मंगल की चाल क़यामत है
रोक सको तो रोको इनको
अरे रोक सको तो रोको इनको
वरना दुनिया पे
आफ़त है आफ़त है आफ़त है
दोनों पगले है प्राणी
दोनों पगले है प्राणी
सुनलो क्या कहते है ज्ञानी
दोनों पगले है प्राणी
सुनलो क्या कहते है ज्ञानी
इनका तो स्टेटस पेमानेंट क्वारंटिन है
सूरज पे मंगल भारी
ये कैसी नयी बीमारी
सूरज पे मंगल भारी
ये कैसी नयी बीमारी
सूरज पे मंगल भारी
सूरज पे मंगल भारी
सूरज पे मंगल भारी
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